Thursday 20 November 2014

फैशनेबल पशु-प्रेमियों ने बढ़ाया आदमखोर कुत्तों का हौसला !

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    हमारे शहर में पिछले एक साल से आवारा कुत्तों का भयानक आतंक है  कुछ फैशनेबल पशु-प्रेमियों के चलते उनके  हौसले बुलंद होते जा रहे हैं .  होटलों और मांस-मछली विक्रेताओं के ठेलों के आस -पास  जूठन की लालच में इनके झुण्ड के झुण्ड घूमते रहते हैं  . शहर के आऊटर में जगह-जगह बेतरतीब और अवैध रूप से संचालित ब्रायलर मुर्गों और अण्डों की दुकानों के इर्द -गिर्द इन आवारा कुत्तों को सुस्ताते देखा जा सकता है .ये वहाँ मुर्गों के पंखों और मांस के लोथड़ों की लालच में ध्यान लगाए बैठे रहते हैं और जैसे ही कोई दुकानदार इस प्रकार के अवशेषों को लापरवाही से फेंकता है ,ये उस दिशा में दौड पड़ते हैं .रात में सडकें सुनसान होने पर भी ये आवारा हिंसक पशु वहीं पर अपना डेरा जमाए रहते हैं .
      विगत एक वर्ष में दर्जनों लोगों पर इन लावारिस कुत्तों ने हमले किए , कई लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया और कई मासूम बच्चों को भी अपना शिकार बनाया . ऐसा नहीं है कि शासन-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है. नगर-निगम के अधिकारियों ने इन कुत्तों को जहर देकर मारना चाहा ,उनकी नसबंदी के प्रयास किये ,लेकिन जब -जब ऐसी कोशिशें हुई , स्वयं  को पशु-प्रेमी कहलाने वालों के कुछ  स्वयं -भू संगठन के लोग अखबार बाजी करने लगे कि निरीह जानवरों पर अत्याचार हो रहा है .  कोई उपाय न देखकर नगर-निगम वालों ने इन आवारा कुत्तों को शहर की सरहद से काफी दूर जंगल में छोड़ना शुरू किया ,तो एक नई समस्या तन कर खड़ी हो गई . ये कुत्ते अब गाँवों में आतंक फैलाने लगे .शहर से लगभग तीस किलोमीटर परस्थित  एक गाँव से खबर आयी है कि वहाँ इन आवारा कुत्तों ने खुले में खेल रहे एक दर्जन नन्हें बच्चों को काटकर बुरी तरह जख्मी कर दिया .शहर के आऊटर पर एक कॉलोनी में ऐसे ही कुछ आवारा कुत्तों ने एक भिखारन को नोच-खसोट  कर मार डाला . इतना होने के बाद भी शहर के स्वनाम धन्य पशु-प्रेमियों का दिल नहीं पसीज रहा है .
        आदमखोर होते जा रहे इन आवारा कुत्तों को  खत्म करने के लिए जब-जब शासन -प्रशासन ने नगर -निगम के साथ मिलाकर कोई कदम उठाना चाहा , इन लोगों ने उसका विरोध शुरू कर दिया . कोई उनसे यह क्यों नहीं पूछता कि मानव -जीवन ज्यादा कीमती है या आदमखोर कुत्ते ? गौर तलब है कि ये लावारिस कुत्ते  राहगीरों,स्कूली बच्चों  और  आम नागरिकों पर हमले कर रहे हैं .  कामकाजी लोग रात में दोपहिया गाड़ियों में घर लौटे हैं तो ये उन पर झपट्टा मारते की कोशिश करते है .ऐसे में कई जानलेवा दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं .पशु-प्रेमी संगठन के स्व-घोषित नेताओं को वह सब नज़र नहीं आता .लगता है अब एक ही उपाय रह गया है-लोग अपने घरों के आस-पास आवारा और हिंसक कुत्तों को देखते ही  चुपचाप उन्हें खाने में जहर मिलाकर खिला दें . इसके बाद भी अगर स्वघोषित पशु-प्रेमी इसका विरोध करें तो इन लावारिस कुत्तों को उनके घरों के भीतर ले जाकर छोड़ देना चाहिए और उनसे कहना चाहिए कि अब आप ही इनकी परवरिश कीजिए !
(स्वराज्य करुण )

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